एक पिता, एक साज़िश और गोलियों की आवाज़: कैसे घरेलू कलह ने उत्तर प्रदेश में एक खौफनाक अपराध को जन्म दिया

Khabri Bala

नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश

यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है। एक ऐसा मामला जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या घरेलू तनाव इंसान को इस हद तक अंधा कर सकता है कि वह अपने ही परिवार के खिलाफ साज़िश रच दे।

उत्तर प्रदेश के एक जिले में सामने आए इस सनसनीखेज मामले में पुलिस का दावा है कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या के लिए कथित तौर पर पेशेवर शूटरों को सुपारी दी। जब यह योजना विफल रही, तो आरोप है कि उसने खुद हथियार उठाया।


रिश्तों में दरार से अपराध की ओर

पुलिस जांच के अनुसार, दंपति के बीच पिछले कुछ वर्षों से गंभीर विवाद चल रहा था। पारिवारिक कलह, आर्थिक तनाव और आपसी अविश्वास ने रिश्ते को इस कदर खोखला कर दिया था कि साथ रहना मुश्किल हो गया था।

पड़ोसियों का कहना है कि घर से अक्सर झगड़े की आवाज़ें आती थीं। कई बार मामला पंचायत और रिश्तेदारों तक भी पहुँचा, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

यहीं से, पुलिस के अनुसार, कथित साज़िश की नींव पड़ी।


सुपारी किलिंग की पहली कोशिश

जांच में सामने आया है कि आरोपी पति ने पहले सीधे अपराध करने के बजाय बाहर के लोगों से संपर्क किया। कथित तौर पर उसने कुछ शूटरों को पैसे देकर हत्या की योजना बनाई।

हालांकि, पहली कोशिश असफल रही। पुलिस सूत्रों का कहना है कि या तो शूटर डर गए या फिर योजना ठीक से अंजाम नहीं दी जा सकी। यह विफलता आरोपी के लिए एक मोड़ साबित हुई।


जब योजना फेल हुई, तब उठा खुद का हाथ

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद आरोपी ने कथित रूप से खुद ही अपराध को अंजाम देने का फैसला किया। एक दिन, जब घर में सामान्य माहौल था, तभी अचानक गोलियों की आवाज़ गूंजी।

महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई।


शुरुआती बयान और शक की सुई

शुरुआत में आरोपी ने इसे बाहरी हमलावरों का मामला बताया। उसने दावा किया कि अज्ञात बदमाशों ने हमला किया और फरार हो गए।

लेकिन पुलिस को कहानी शुरू से ही संदिग्ध लगी।

  • घर में जबरन घुसने के कोई साफ़ निशान नहीं थे
  • सीसीटीवी फुटेज में बाहरी गतिविधि नहीं दिखी
  • कॉल डिटेल्स और पैसों के लेनदेन ने कई सवाल खड़े किए

यहीं से जांच की दिशा बदल गई।


कॉल रिकॉर्ड और पैसों ने खोला राज

पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन और बैंक रिकॉर्ड की जांच की। कॉल डिटेल्स में कुछ ऐसे नंबर सामने आए, जिनका कोई पारिवारिक या सामाजिक संबंध नहीं था।

इन नंबरों से जुड़े लोगों की पहचान होने पर कथित सुपारी किलिंग की कहानी सामने आई।

जांच अधिकारियों का कहना है कि पैसों के ट्रांजैक्शन भी उसी समय के आसपास हुए, जब हत्या की पहली कोशिश की गई थी।


गिरफ्तारी और कबूलनामा

सबूतों के आधार पर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया। लंबी पूछताछ के बाद, पुलिस का दावा है कि आरोपी ने साज़िश में अपनी भूमिका स्वीकार की।

हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत यह कबूलनामा अदालत में परखा जाएगा।

आरोपी के खिलाफ हत्या, आपराधिक साज़िश और अवैध हथियार रखने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।


परिवार और समाज पर असर

इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि समाज के सामने भी कई सवाल रख दिए।

मृतका के परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मामला इस हद तक पहुँच जाएगा। वहीं, बच्चों (यदि कोई हों) के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे समय तक चला घरेलू तनाव, अगर समय पर संभाला न जाए, तो गंभीर अपराध में बदल सकता है।


कानून क्या कहता है?

भारतीय दंड संहिता के तहत:

  • हत्या के लिए उम्रकैद या फांसी तक का प्रावधान है
  • आपराधिक साज़िश एक अलग गंभीर अपराध है
  • सुपारी किलिंग को अदालतें अत्यंत संगीन अपराध मानती हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आरोप साबित होते हैं, तो आरोपी को कठोर सज़ा मिल सकती है।


बड़ा सवाल: अपराध की जड़ कहाँ?

यह मामला सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है। यह घरेलू हिंसा, मानसिक तनाव और संवाद की कमी का आईना भी है।

क्या समय रहते हस्तक्षेप होता, तो यह अपराध टल सकता था?
क्या समाज और परिवार की भूमिका सिर्फ तमाशबीन बनने तक सीमित रह गई?

ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब आसान नहीं।


निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अपराध अक्सर अचानक नहीं होते — वे धीरे-धीरे पनपते हैं। रिश्तों में बढ़ता ज़हर, अनसुनी शिकायतें और मदद न मिलना, अंततः एक भयावह अंजाम तक ले जाता है।

अब अंतिम फैसला अदालत करेगी। लेकिन इस घटना ने यह ज़रूर सिखाया है कि घरेलू विवाद को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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